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शेयर मार्किट में ऑपरेटर कौन होते हैं

शेयर मार्किट में ऑपरेटर कौन होते हैं –

आपने शेयर मार्किट में ऑपरेटर और किसी शेयर के अंदर upper सर्किट और lower सर्किट के बारे में सुना होगा। ज़ब upper सर्किट होता हैं तब आप उस शेयर को खरीद नहीं पाते और ज़ब lower सर्किट होता हैं तब उसे बेच नहीं पाते।क्या कभी आपने सोचा ऐसा kyo होता हैं। अगर नहीं पता तो आज हम आपके इन सभी सवालों ka जवाब देंगे। और किसी शेयर में लगने वाले इन circuits और इनको लगाने में मुख्य भूमिका लगाने वाले ऑपरेटर्स के बारे में विस्तार से बताएंगे।

शेयर मार्किट के वो बड़े निवेशक जो अपने फायदे के लिए किसी शेयर के मूल्य को ऊपर नीचे करते हैं। अथवा वो लोग जो लाभ कमाने के लिए किसी शेयर की कीमत को ऊपर ले जाने या फिर नीचे गिराने के जिम्मेवार होते हैं उनको शेयर मार्किट में ऑपरेटर कहा जाता हैं। ये लोग कई रूपों में जाने जाते हैं जैसे – कई ब्रोकरों का समूह, सटोरियों का समूह या फिर कई बार कंपनी के मैनेजमेंट के सदस्य भी इसमें शामिल होते हैं जो अपने फायदे के लिए शेयर्स की कीमत को ऊपर नीचे करते हैं।

ऑपरेटर्स कैसे शेयर की कीमत पर नियंत्रण पाते हैं –

ऑपरेटर्स सबसे पहले किसी शेयर को select करते हैं। उसके बाद ये ऑपरेटर्स लगातार इस शेयर में निवेश करते हैं जिस कारण इस शेयर की डिमांड बढ़ने लगती हैं। तभी ये लोग अपना खेल शुरू करते हैं। और अपने लोगों, मीडिया व अन्य तरीको से मार्किट में इस शेयर्स के बारे में पॉजिटिव न्यूज़ फैलाते हैं। जिस कारण रिटेल निवेशक इस शेयर की तरफ आकर्षित होते हैं।

इसके बाद ये रिटेल निवेशक ज्यादा मुनाफे के चककर में इस शेयर में ज्यादा निवेश करने लगते हैं। जिस कारण इस शेयर की डिमांड ज्यादा होने के कारण इसका भाव बढ़ने लग जाता हैं और इसमें upper सर्किट लग जाता हैं। ऐसा sebi ने रिटेल निवेशकों को बचाने के लिए किया हैं। क्योंकि अगर सर्किट ना लगे तो ये ऑपरेटर्स ek दिन me ही अपना खेल निपटा देंगे जिससे आम निवेशक को बहुत नुक्सान होगा। इसके बाद अब रिटेल निवेशको को लगता हैं की इस शेयर का price बहुत ऊपर जाने वाला हैं जिस कारण वे इसमें बने रहते हैं ताकि उनका मुनाफा बढ़ता रहे।

परन्तु इसी बीच ऑपरेटर्स इस शेयर को धीरे – धीरे बेच कर अपना प्रॉफिट बुक करने लग जाते हैं । जिसका रिटेल निवेशकों को पता नहीं लग पाता और अंत में वो अपने सभी शेयर बेच देते हैं जिससे शेयर की सप्लाई ज्यादा होने लग जाती हैं और डिमांड कम हो जाती हैं।

जिससे शेयर की कीमत लगातार घटने लगती हैं जिससे इसमें lower सर्किट लगने लग जाते हैं। जिस कारण इस शेयर को कोई नहीं खरीदता और रिटेल निवेशक इस शेयर में बुरी तरह फंस जाते हैं। और ऑपरेटर मोटा पैसा कमा कर निकल जाते हैं।

ऑपरेटर्स कैसे रिटेल निवेशकों को फंसाते हैं –

ये ऑपरेटर पहले किसी भी शेयर को ऑपरेट करने के लिए choose करते हैं। फिर उसमे खरीदारी करते हैं और इसके बाद अपने लोगों और मीडिया जैसे – यूट्यूब, फेसबुक, ट्विटर इत्यादि प्लेटफॉर्म का सहारा लेकर इस शेयर के लिए पॉजिटिव माहौल बनाते हैं।कभी -कभी तो कंपनी की मॅनॅग्मेंट तक इनके साथ मिली होती है। अब आम निवेशक को लगता है की ये शेयर बहुत अच्छा है। इसके बाद ज़ब ये आम निवेश इसमें enter करते हैं तो ये ऑपरेटर अपना प्रॉफिट बुक करके इन निवेशकों को इसमें फंसा कर खुद बाहर निकल जाते हैं।

इसके लिए ये ऑपरेटर्स pump and dump तकनीक का प्रयोग करते हैं। मतलब किसी शेयर को कम रेट पर खरीदो फिर उसके बारे अच्छी खबर फैलाओ और उसको अच्छे रेट तक ले जाओ। और फिर अपना प्रॉफिट बुक करके उस शेयर को बेच दो। जिससे इस शेयर की कीमत धड़ाम से नीचे पड़ती है जिस कारण आम निवेशक इसमें फंस जाते है।

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